पदबंध किसे कहते हैं ?




आप जानते हैं पदबंध किसे कहते हैं ? तो आज हम आपको ” पदबंध किसे कहते हैं ” के बारे मैं जानकारी देने बाले हैं। जिससे आपको पदबंध किसे कहते हैं पता चलेगा। तो आइये जानते हैं “ पदबंध किसे कहते हैं”

पदबंध :

पदबंध ” जब दो या अधिक पद मिलकर एक ही शाब्दिक इकाई ( संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण , क्रिया , अव्यय ) का काम करते हैं , तो ऐसे पद – समूह को ‘ पदबंध ‘ कहते हैं । ”

पदबंध के लिए दो शर्तों का होना आवश्यक है । पहली यह कि पद अकेला न होकर एकाधिक हो और दूसरी , पदों का समूह वाक्य में एक भाषिक इकाई का कार्य करता हो यानी हर एक पद उस इकाई को ही पुष्ट करता हो ।

नीचे लिखे वाक्यों को देखें :

( a ) लाहौर से पेशावर जानेवाली बस खराब हो गई है ।

( b ) हमारे बिहार राज्य की राजधानी पटने में इस समय 50 लाख लोग रहते हैं ।

उपर्युक्त वाक्यों में हम देखते हैं :

बस कौन – सी ?

जो लाहौर से पेशावर जाती है ।

पटना क्या है ।

राजधानी ।

कहाँ की ?

हमारे बिहार राज्य की ।

‘ लाहौर से पेशावर जानेवाली ‘ पद – समूह ‘ बस ‘ के लिए और हमारे बिहार राज्य की राजधानी पद – समूह ‘ पटने के लिए प्रयुक्त होकर पदबंधों का निर्माण कर रहे हैं ।

पदबंधों की पहचान के लिए यदि मान लिया जाय कि उक्त वाक्यों में शुरू से ‘ बस ‘ और ‘ पटना ‘ तक के पद रेखांकित हैं । अंतिम पद संज्ञाएँ हैं , इसलिए उस रेखांकित पदबंध को ‘ संज्ञा पदबंध ‘ के नाम से जाना जाएगा । कहने का तात्पर्य यह कि रेखांकित पदों में से अंतिम पद के नाम पर ही उस पदबंध का नाम रखा जाता है ।

नीचे लिखे अन्य उदाहरणों को देखें :

1. स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं . जवाहरलाल नेहरू ने ‘ डिस्कवरी ऑफ इंडिया ‘ लिखा । ( संज्ञा पदबंध )

2. महात्मा बुद्ध के समय से चली आई ध्यान पद्धति पर दलाईलामा ने व्याख्यान दिया । ( संज्ञा पदबंध )

3. बगुले की तरह लंबी बड़ी अजीब लगती है । ( विशेषण पदबंध )

4. विस्कोमान भवन की आठवीं मंजिल पर नालंदा ऑपेन यूनिवर्सिटी का कार्यालय है । ( क्रियाविशेषण या अव्यय पदबंध )

5. जो छात्र दिन – रात मेहनत करते हैं वे ही परीक्षा में अच्छा अंक लाते हैं । ( सर्वनाम पदबंध )

6. वर्षाकाल में रोपा गया गुलमोहर का पौधा तीव्र वेग से फलता – फुलता जा रहा था । ( क्रिया पदबंध )

पदबंध के मुख्यतः कितने प्रकार होते हैं ?

पदबंध के मुख्यतः पाँच प्रकार होते हैं :

1. संज्ञा पदबंध : संज्ञा पद के स्थान पर प्रयुक्त होनेवाला पद – समूह को ‘ संज्ञा पदबंध ‘ कहते हैं । इसमें प्रयुक्त होनेवाले सभी पद किसी संज्ञा को ही स्पष्ट करते हैं । ये विभिन्न कारक रूपों में आते हैं । जैसे-

1. रात में पहरा देनेवाला पहरेदार कल गोली का शिकार हुआ ।

2. मैंने एक दहशत पैदा कर देनेवाली विदेशी फिल्म देखी ।

3. प्रदूषण पैदा करनेवाले वाहनों को बंद किया जाना चाहिए ।

4. पिताजी अपने सभी बच्चों के लिए मिठाई लाये ।

5. मेरे प्यारे होनेहार बच्चो ! समय का ध्यान रखो ।

6. उसके जीवन भर की कमाई पल में नष्ट हो गई ।

7. अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राम ने रावण को मारा ।

2. सर्वनाम पदबंध : पदों का वैसा समूह , जो किसी सर्वनाम के बारे में बताए , ‘ सर्वनाम पदबंध ‘ कहलाता है । जैसे –

1. शेर की तरह दहाड़नेवाले आप भीगी बिल्ली कैसे बन गए ?

2. असाधारण प्रतिभा के धनी तुम अपना समय क्यों नष्ट कर रहे हो ?

3. जो छात्र दिन – रात मेहनत करता है वह कभी असफल नहीं होता है ।

4. जो वीर प्राण हथेली पर लेकर देश सेवा में जाते हैं , वे अवश्य विजयी होते हैं ।

5. कल कल , छल – छल करनेवाली वह नदी अब नहीं रही ।

3. विशेषण पदबंध : वह पद समूह , जो विशेषण की तरह काम करे या किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताने के लिए प्रयुक्त हो , ‘ विशेषण पदबंध ‘ कहलाता है । जैसे-

1. शरद् की सुखद व मनहोहक चाँदनी से आच्छादित रात का सौंदर्य देखते ही बनती है ।

2. विश्वकप में सर्वाधिक रन का कीर्तिमान बनानेवाला पाकिस्तान इस बार फिर विजयी रहा ।

3. आप मेरे लिए एक सचित्र – सुन्दर और सामाजिक उपन्यास लेते आइएगा ।

4. गुलाब के फूल – जैसा शिशु का मुख किसे मुग्ध नहीं करता ?

5. बहुत बड़े पंखे जैसे मोर के पंख नाच के समय खुलकर फैल जाते हैं ।

6. ताजे शोणित से सने वस्त्र की भाँति पूरब की लालिमा खरगोश की आँख के समान दिख रही थी ।

7. न जाने कितने लोग इस बार भी बाढ़ के पेट में समा गए ।

8. दो गिलास भर पानी दो घंटों के लिए काफी है ।

4. क्रिया पदबंध : जहाँ एक से अधिक पद क्रिया का काम करते हैं , वहाँ वे क्रियापदबंध ‘ कहलाते हैं । जैसे-

1. आशु रोते – रोते सो गई

2. मेघा ने कागज फाड़कर टुकड़े – टुकड़े कर दिए

3. शालू रूक रूककर धीरे धीरे चल रही थी

4. रचना भारती सुबह ही नहा धोकर तैयार हो गई थी

5. क्रियाविशेषण पदबंध या अव्यय पदबंध : वाक्य में अव्यय को स्पष्ट करनेवाले पद – समूह ही क्रिया विशेषण ‘ या ‘ अव्यय पदबंध ‘ कहलाते हैं । जैसे-

1. वह सुबह से शाम तलक पढ़ता रहा ।

2. उसी छोटी – सी पहाड़ी के निकट छलछलाता झरना है ।

3. पिछले कई वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष भी बी . पी . एस . की दसवीं कक्षा का परिणाम अच्छा ही रहा ।

4. दारोगा गुस्से में बड़े जोरों से दाँते पीसता हुआ जा रहा था ।

5. भली – भाँति परीक्षण कर लेने के बाद ही उसने हमारा काम किया ।

Leave a Reply