उपवाक्य किसे कहते हैं ?




आप जानते हैं उपवाक्य किसे कहते हैं ? तो आज हम आपको ” उपवाक्य किसे कहते हैं ” के बारे मैं जानकारी देने बाले हैं। जिससे आपको उपवाक्य किसे कहते हैं पता चलेगा। तो आइये जानते हैं “ उपवाक्य किसे कहते हैं”

उपवाक्य किसे कहते हैं ?

उपवाक्य “ पदों का ऐसा समूह , जिसमें वाक्य के सारे गुण हों सिर्फ आकांक्षा शेष रह जाए और इसी कारण से उनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं हो ; वाक्य के साथ हो , ‘ उपवाक्य ‘ कहलाता है । “

उपवाक्य वाक्य का अंग होता है । यह अर्थ बोध की क्षमता रखते हुए भी स्वतंत्र रूप से ( वाक्य की भाँति ) प्रयुक्त नहीं होता है । नीचे लिखे उदाहरणों को देखें और सोचें कि क्या इनके ऐसे प्रयोग से काम चल पाएगा ?

  • मैंने आपसे कहा था कि ………………..| क्या ?
  • जबतक आप नहीं आते तब तक……………… | क्या ?
  • वह नौकर भाग गया……………. | कौन ?

हम देख रहे हैं कि आगे की बात जानने की आकांक्षा शेष रह जाती है । यदि ऐसा लिखा । । जाय :

( a ) मैंने आपसे कहा था कि वहाँ न जाए ।

( b ) जबतक आप नहीं आते तबतक मैं यहीं रहूँगी ।

( c ) वह नौकर भाग गया , जो कल आया था ।

तो वाक्य पूर्ण हो जाता है , यानी कोई आकांक्षा शेष नहीं रह पाती है । हमने देखा कि शेष अंश अधूरे वाक्य को पूरा कर रहा है । वह शेष अंश ही उक्त वाक्यों में उपवाक्य है ।

साधारणतया उपवाक्य कितने प्रकार के होते हैं ?

साधारणतया उपवाक्य दो प्रकार के होते हैं :

  • मुख्य या प्रधान उपवाक्य और
  • आश्रित उपवाक्य ।

मुख्य या प्रधान उपवाक्य किसे कहते हैं ?

जो उपवाक्य अर्थ का प्रमुख आधार सुनिश्चित करता है , वह ‘ प्रधान उपवाक्य ‘ कहलाता है।

जिस उपवाक्य की क्रिया मुख्य हो , उसे ही मुख्य उपवाक्य मानना चाहिए । वाक्य में मुख्य क्रिया को पहचानने का सबसे आसान तरीका यही है कि मिश्रवाक्य को ( मिश्रवाक्य में ही आश्रित अंश हुआ करता है । ) सरल वाक्य में रूपांतरित करके देखें कि वाक्य का कौन सा भाग ज्यों का त्यों रह जाता है । जो भाग ज्यों – का – त्यों रह जाता है , वही मुख्य उपवाक्य होगा । जैसे-

मैंने सोचा भी नहीं था कि आज वह भी आएगा ।

इस वाक्य का सरल रूप होगा-

आज वह भी आएगा इस बारे में मैंने सोचा भी नहीं था ।

हम देख रहे हैं कि ‘ मैंने सोचा भी नहीं था ‘ यह ज्यों का त्यों रह गया है । इस कारण यही अंश प्रधान या मुख्य उपवाक्य होगा ।

आश्रित उपवाक्य किसे कहते हैं ?

लंबे वाक्यों में जो उपवाक्य स्वतंत्र रूप से पूर्ण अर्थबोध नहीं करा सकते और जो मुख्य क्य के आश्रित होते हैं , उन्हें ‘ आश्रित उपवाक्य ‘ कहते हैं ।

आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं –

1. संज्ञा उपवाक्य : वह उपवाक्य , जो संज्ञा की तरह प्रयुक्त हो यानी किसी – न – किसी काम या नाम को इंगित करे , ‘ संज्ञा उपवाक्य ‘ कहलाता है ।

संज्ञा उपवाक्य प्रायः ‘ कि ‘ से जुड़ा रहता है ।

2. विशेषण उपवाक्य : जब कोई उपवाक्य , मुख्य वाक्य की किसी संज्ञा के विशेषण का काम करे तब उसे ‘ विशेषण उपवाक्य ‘ कहते हैं । विशेषण उपवाक्यों को ‘ जो ‘ , ‘ जैसा ‘ , ‘ जितना ‘ , ‘ जब ‘ , ‘ जहाँ ‘ , ‘ जिसे ‘ इत्यादि शब्दों से आरंभ करते हैं और मुख्य वाक्यों में उसके नित्य संबंधी शब्द लाते हैं । जैसे –

वह अपने विद्यार्थी को जो भाग गया था , बहुत मानता है ।

विशेषण उपवाक्य कभी – कभी ये नित्य शब्द लुप्त भी रहते हैं । जैसे-

जिसकी लाठी उसकी भैंस

3. क्रियाविशेषण उपवाक्य : जो उपवाक्य , प्रधान उपवाक्य की क्रिया के बारे में कोई सूचना दे यानी उसके काल , स्थान , रीति , परिमाण या परिणाम बताए , उसे ‘ क्रियाविशेषण उपवाक्य ‘ कहते हैं । जैसे-

( a ) ज्योंही मैं स्टेशन पहुँचा , त्योंही गाड़ी खुल चुकी थी ।

( b ) जहाँ तुम पढ़ते थे वहीं मैं भी पढ़ता था ।

( c ) मैंने वैसे ही किया जैसा आपने बताया था ।

( d ) जैसे – जैसे आमदनी बढ़ती जाती है , वैसे वैसे खर्च भी बढ़ता है ।

( e ) यदि मैंने पढ़ा होता तो अवश्य सफल होता ।

क्रियाविशेषण उपवाक्यों को जब , जहाँ , जिधर , ज्यों , यदि , यद्यपि , कि आदि शब्दों से आरंभ करते हैं । इस कारण से उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाविशेषण उपवाक्य हुए-

( a ) ज्योंही मैं स्टेशन पहुंचा ।

( b ) जहाँ तुम पढ़ते थे ।

( c ) जैसा आपने बताया था ।

( d ) जैसे – जैसे आमदनी बढ़ती है और

( e ) यदि मैंने पढ़ा होता ।

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