वाक्य – भेद कितने प्रकार के होते हैं ? वाक्य – भेद एक वाक्य से और एक वाक्य मैं कैसे परिवर्तन होता हैं ?




आप जानते हैं वाक्य – भेद कितने प्रकार के होते हैं ? तो आज हम आपको “वाक्य – भेद कितने प्रकार के होते हैं ? वाक्य – भेद एक वाक्य से और एक वाक्य मैं कैसे परिवर्तन होता हैं ? ” के बारे मैं जानकारी देने बाले हैं। जिससे आपको वाक्य – भेद कितने प्रकार के होते हैं ? वाक्य – भेद एक वाक्य से और एक वाक्य मैं कैसे परिवर्तन होता हैं ? पता चलेगा। तो आइये जानते हैं “वाक्य – भेद कितने प्रकार के होते हैं ? वाक्य – भेद एक वाक्य से और एक वाक्य मैं कैसे परिवर्तन होता हैं ? “

वाक्य – भेद कितने प्रकार के होते हैं ?

स्वरूप या रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं –

1.सरल वाक्य :

” जिस वाक्य में केवल एक उद्देश्य और एक विधेय हो अथवा अनेक उद्देश्यों का सभी विधेयों से समान संबंध हो , ‘ सरल वाक्य ‘ कहलाता है । ” जैसे –

घोड़ा ताँगा खींचता है । ( एक उद्देश्य – एक विधेय )

माता – पिता पार्क में बैठे हैं । ( दो उद्देश्य – एक विधेय )

अंशु , आशु , प्रवर और प्रखर एक साथ खाते – पीते , पढ़ते लिखते और खेलते कूदते हैं । ( अनेक उद्देश्य अनेक विधेय )

2. मिश्रवाक्य :

” जिस वाक्य में एक सरल वाक्य तथा इसके आश्रित एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों , ‘ मिश्रवाक्य ‘ कहलाता है । ” जैसे-

मैं देखता हूँ कि तुम मेहनत नहीं करते हो ।
सरल वाक्य…………….. आश्रित उपवाक्य
सूरज उगा इसीलिए अँधेरा भागा ।

3. संयुक्त वाक्य :

” जिस वाक्य में दो सरल या मिश्रवाक्य ( दो से अधिक भी ) परस्पर किसी अव्यय से संयुक्त हो , ‘ संयुक्त वाक्य ‘ कहलाता है । “

चूँकि संयुक्त वाक्य में दोनों वाक्य जो जुड़े हैं , स्वतंत्र होते हैं , वे किसी पर आश्रित नहीं होते , इसलिए संयुक्त वाक्य के मुख्य वाक्य को ‘ समानाधिकरण वाक्य ‘ भी कहा जाता है । जैसे –

सूरज उगा ……….और ………….अँधेरा भागा ।
सरल वाक्य ………योजक………. सरल वाक्य
श्याम माखनचोर है , ……. इसलिए………. जब मैं ढूँढ़ती हूँ तब वह कहीं छिप जाता है ।
सरल वाक्य……………………………………………………. मिश्रवाक्य

समानाधिकरण वाक्य ( संयुक्त वाक्य का मुख्य वाक्य ) चार प्रकार के होते हैं-

1. संयोजक : इसमें केवल एक वाक्य दूसरे से समान या असमान अवधारण के साथ युक्त रहता है । जैसे –

मैं आगे बढ़ गया और तू पीछे रह गया ।

वस्त्र केवल शरीर की शोभा ही नहीं बढ़ाते अपितु हमारे शरीर की रक्षा भी करते हैं ।

2. विभाजक : इसके मुख्य वाक्यों में व्यावृत्ति या विकल्प का संबंध रहता है । जैसे –

वह जीता है या मर गया ? न वहाँ कोई मनुष्य मिला , न कोई पशु – पक्षी ही दिखा ।

3. विरोधदर्शक : इसके मुख्य वाक्यों में परस्पर विरोध रहता है । जैसे –

आपको सत्य बोलना चाहिए ; परन्तु वह अप्रिय न हो ।

4. कारणसूचक : इसके मुख्य वाक्यों में परस्पर फल और कारण का संबंध रहता है । जैसे –

हिमालय पर्वत अतिरमणीय है , क्योंकि वहाँ प्रकृति के वास्तविक दर्शन होते हैं ।

नोट : जब संयुक्त वाक्यों के अंशों में उद्देश्य , विधेय आदि की पुनरावृत्ति नहीं करके अव्यय आदि से काम चलाया जाता है , तब उसे ‘ संकुचित वाक्य ‘ कहा जाता है । जैसे-

रामू और श्यामू एक ही जगह पढ़ते – लिखते हैं ।

मैंने पुस्तक खरीदी और पढ़ी भी ।

वाक्य – भेद एक वाक्य से और एक वाक्य मैं कैसे परिवर्तन होता हैं ?

सरल वाक्य से मिश्रवाक्य में परिवर्तन

सरल वाक्य के एक या अधिक पदों को उपवाक्य में बदल देने से वह मिश्र वाक्य बन जाता है । जैसे –

सरल वाक्यमिश्रवाक्य
1. सुशील बालक बड़ों की आज्ञा मानते हैं ।
2. चार ने अपने बचाव का कोई उपाय नहीं देखा
3. रात्रिचर प्राणी दिन में प्रायः छिपे रहते हैं ।
4. विपत्ति में धीरज रखो ।
5. दयाहीन व्यक्ति पशु से भी बदतर है ।
1. जो बालक सुशील होते हैं वे बड़ों की आज्ञा मानते हैं ।
2. चोर ने देखा कि उसके बचाव का कोई देखा उपाय नहीं है ।
3. जो प्राणी रात्रि में विचरण करते हैं वे दिन में प्रायः छिपे रहते हैं ।
4. जब विपत्ति आए तब धीरज रखो ।
5. जिसे दया नहीं है , वह व्यक्ति पशु से भी बदतर है ।
सरल से संयुक्त और संयुक्त से सरल वाक्यों में परिवर्तन

सरल वाक्य के किसी पदबंध को एक अपेक्षारहित वाक्य में बदल देने से वह संयुक्त वाक्य बन जाएगा । ऐसी अवस्था में योजक का प्रयोग होता है । यदि पदबंध में कोई असमापिका क्रिया हो तो उसे समापिका में बदलकर निरपेक्ष वाक्य बनाना चाहिए । जैसे—

( i ) बिल्ली के पंजे में नाखून होते हैं ।

बिल्ली के पंजे होते हैं और उनमें नाखून होते हैं ।

( ii ) सूर्योदय होते ही हम अपने कार्य में लगे ।

सूर्योदय हुआ और हम अपने कार्य में लगे ।

संयुक्त वाक्य में एक निरपेक्ष वाक्य को छोड़ शेष को पदों या पदबंधों में बदल देने से वह सरल वाक्य बन जाता है । कभी – कभी समापिका क्रिया को पूर्वकालिक में बदलकर सरल वाक्य बनाया जाता है । सरल वाक्य बनाने पर योजक अव्यय छूट जाता है | जैसे—

( i ) आप उसे बहुत चाहते थे , इसलिए वह नष्ट हुआ ।

आपके बहुत चाहने से वह नष्ट हुआ ।

( ii ) आपसे आशा थी , परन्तु वह पूरी न हुई ।

आपसे मेरी आशा पूरी न हुई ।

यदि दो अलग – अलग सरल वाक्य हों तो उन्हें ‘ और ‘ , तथा , एवं , ‘ व ‘ आदि से जोड़कर दोनों को संयुक्त कर देना चाहिए । जैसे –

सूर्योदय हुआ । चिड़ियाँ चहचहाने लगीं ।

सूर्योदय हुआ और चिड़ियाँ चहचहाने लगीं ।

कुछ अन्य उदहरण देखें :

सरल संयुक्त
1. मुझे अप्रिय सत्य बोलना उचित नहीं ।
2. आगे बढ़कर शत्रुओं का सामना करो ।
3. मुझे देखकर वह खिसक गया ।
4. रात के बारह बजे मैंने पढ़ना बन्द कर दिया ।
5. वह आया । उसने कुछ नहीं कहा ।
6. मैं आपसे मिलकर बहुत सारी बातें करूँगा ।
1. मुझे सत्य बोलना उचित है और वह अप्रिय नहीं हो ।
2. आगे बढ़ो और शत्रुओं का सामना करो ।
3. उसने मुझे देखा और वह खिसक गया ।
4. रात के बारह बजे और मैंने पढ़ना बंद कर दिया ।
5. वह आया और उसने कुछ नहीं कहा ।
6. मैं आपसे मिलूँगा और बहुत सारी बातें करूँगा ।
मिश्रवाक्य से संयुक्त और संयुक्त वाक्य से मिश्रवाक्य में परिवर्तन :

मिश्रवाक्य के उपवाक्य को प्रधान में बदलकर संयुक्त वाक्य बनाया जाता है । ऐसी स्थिति में मिश्र के नित्यसंबंधी अव्यय आदि शब्दों और ‘ कि ‘ के बदले योजक या विभाजक अव्यय लगते हैं जैसे-

यद्यपि तू धनी है तथापि सुखी नहीं है ।

तू धनी है ; परन्तु सुखी नहीं है ।

संयुक्त वाक्य के निरपेक्ष वाक्य को छोड़ शेष को अप्रधान में बदलने से वह मिश्रवाक्य बन जाता है । ऐसी स्थिति में योजक और विभाजक अव्ययों के स्थान पर नित्यसंबंधी शब्दों और ‘ कि ‘ का प्रयोग होता है । जैसे –

वह मूर्ख है ; परन्तु उसे व्यावहारिक ज्ञान है ।

यद्यपि वह मूर्ख है तथापि उसे व्यावहारिक ज्ञान है ।

कुछ अन्य उदाहरण देखें :

मिश्र वाक्य संयुक्त वाक्य
1. वह जानता है कि राजू खराब लड़का है ।
2. यदि अकाल पड़ेगा तो लोग मरेंगे ।
3. यदि तुम चेष्टा करोगे तो भी कोई फल नहीं मिलेगा ।
4. तुमने झूठ कहा है , तब तुम्हारा छुटकारा नहीं ।
5. मैंने एक व्यक्ति को देखा जो बहुत दुबला – पतला था ।
6. मैं उसके घर पहुँचा इसलिए उससे देर तक बातचीत की ।
1. राजू खराब लड़का है और वह जानता है
2.अकाल पड़ेगा और लोग मरेंगे ।
3. चेष्टा मत करो , कोई फल नहीं मिलेगा ।
4. तुमने झूठ कहा है और तुम्हारा छुटकारा नहीं ।
5. मैंने एक व्यक्ति को देखा और वह व्यक्ति बहुत दुबला – पतला था ।
6. मैं उसके घर पहुंचा और मैंने उससे देर तक बातचीत की ।

अर्थ के आधार पर वाक्यों को मुख्यतः कितने भागों में बाँटा गया है ?

अर्थ के आधार पर वाक्यों को मुख्यतः आठ भागों में बाँटा गया है—

1. विधिवाचक या विधानार्थक वाक्य : यदि वाक्य में कार्य के होने अथवा करने का सामान्य कथन हो , निषेधात्मक नहीं तो उसे ‘ विधिवाचक ‘ या ‘ विधानार्थक वाक्य ‘ कहा जाता है । इस तरह के वाक्यों की रूपरेखा सामान्य संरचना के अनुसार होती है । जैसे –

  • ( a ) जाड़े की धूप बहुत प्यारी लगती है ।
  • ( b ) इस साल बिहार के कई जिलों में सूखा पड़ा है ।
  • ( c ) गानों की महफिल यहीं हुआ करती थी ।
  • ( d ) विजयनगर में राजा कृष्णदेव राय रहते थे ।
  • ( e ) तेनालीराम विदूषक थे ।

2. निषेधवाचक वाक्य : यदि वाक्य में कार्य के न होने या न करने का बोध हो तो उसे ‘ निषेधवाचक वाक्य ‘ कहा जाता है । इस तरह के वाक्यों में न , नहीं , मत आदि निषेधसूचक अव्ययों का प्रयोग किया जाता है । जैसे –

  • ( a ) वह घर नहीं जाएगा ।
  • ( b ) दादाजी स्वस्थ नहीं हैं ।
  • ( c ) वह न तो स्वयं सोता है न – ही किसी अन्य को सोने देता है ।
  • ( d ) शिक्षक महोदय घर पर नहीं मिलेंगे ।
  • ( e ) वहाँ पेड़ – पौधे नहीं थे ।

3 . प्रश्नवाचक वाक्य : यदि वाक्य में कोई प्रश्न किया जाय तो वह ‘ प्रश्नवाचक वाक्य ‘ कहलाता है । इस तरह के वाक्यों में क्या , कौन , कहाँ , कैसे , कब , क्यों , किसलिए , न आदि का प्रयोग होता है ; परन्तु प्रायः वाक्यारंभ में ‘ क्या ‘ रखकर विधिवाचक से प्रश्नवाचक वाक्य बनाया जाता है ।

‘ कौन ‘ का प्रयोग किसी सजीव के लिए और ‘ क्या ‘ का प्रयोग निर्जीव के लिए होता है । जैसे-

कौन आया है ?

आपको क्या चाहिए ?

‘ कहाँ ‘ किसी स्थान के बारे में प्रश्न के लिए प्रयुक्त होता है । जैसे –

आप कहाँ रहते हैं ?

वे कहाँ जा रहे हैं ?

‘ कब ‘ का प्रयोग समय – संबंधी प्रश्न के लिए होता है । जैसे –

वह कब जा रहा है ?

उसे कब आना है ?

‘ कैसे का प्रयोग ‘ स्थिति ‘ या ‘ अवस्था ‘ से संबंधित प्रश्न के लिए होता है । जैसे-

आप कैसे हैं ?

आपके दादाजी कैसे हैं ?

‘ कैसे ‘ मार्ग , साधन एवं कारण के लिए भी प्रयुक्त होता है । जैसे-

आप कैसे आए ?

‘ क्यों ‘ और ‘ किसलिए ‘ का प्रयोग कारण – संबंधी प्रश्नों के लिए होता है । जैसे वे क्यों चिल्ला रहे हैं ? आप किसलिए वहाँ जाया करते हैं ?

नोट : ध्यान रखें प्रश्न किया जाता है , पूछा नहीं । जैसे-

शिक्षक छात्रों से प्रश्न पूछते हैं ।

( अशुद्ध ) शिक्षक छात्रों से प्रश्न करते हैं । ( शुद्ध )

प्रश्नवाचक वाक्य निषेधार्थक भी होते हैं । जैसे –

आप क्यों नहीं खाते हैं ?

क्या आप वहाँ नहीं जाते हैं ?

4. विस्मयादिबोधक या विस्मयवाचक वाक्य : यदि वाक्य में विस्मय , शोक , हर्ष , घृणा , खुशी आदि का भाव अभिव्यक्त हो तो उसे ‘ विस्मयादिबोधक वाक्य ‘ कहते हैं । इस तरह के वाक्यों में विस्मयादिबोधक अव्ययों का प्रयोग होता है और उन अव्ययों के बाद विस्मयवाचक चिह्न ( ! ) लगाया जाता है । जैसे –

वाह ! क्या उत्तम दृश्य है ।

अहा ! कितना सुन्दर बच्चा है ।

अरे ! आपने तो कमाल ही कर दिया ।

छि : ! तुम कितने गंदे हो ।

5 . आज्ञावाचक वाक्य : यदि वाक्य में वक्ता का उद्देश्य आज्ञा या अनुमति देना है तो उसे ” आज्ञावाचक वाक्य ‘ जाता है । इसी में बड़े ऑफिसर यदि अपने कर्मचारियों से कुछ करने को कहते हैं तो वह ‘ आदेशवाचक वाक्य ‘ बन जाता है । जैसे –

आप अपनी बात कह सकते हैं ।

एक गिलास पानी लाओ ।

चायवाले से कहो कि वह चार – पाँच कप चाय भेज दे ।

6. इच्छावाचक या इच्छार्थक वाक्य : यदि वाक्य में वक्ता की इच्छा , आशा , शुभकामना या शाप आदि अभिव्यक्त हो तो उसे ‘ इच्छावाचक ‘ या ‘ इच्छार्थक वाक्य ‘ कहते हैं । जैसे –

आपकी यात्रा मंगलमय हो ।

आइए एक एक कप कॉफी पी जाए ।

पिताजी आ जाएँ तो अच्छा हो ।

जा , तुझे नरक में भी जगह न मिले ।

7. संदेहवाचक या संदेहार्थक वाक्य : जिस वाक्य से संदेह या संभावना का बोध हो , उसे ‘ संदेहवाचक ‘ या ‘ सदेहार्थक वाक्य ‘ कहते हैं । जैसे –

अब तक वह सो गया होगा ।

शायद मुझे ही मुम्बई जाना होगा ।

संभव है , कल पठन – पाठन का कार्यक्रम न हो ।

लगता है , मैंने इस व्यक्ति को कहीं देखा है ।

8. संकेतवाचक या संकेतार्थक वाक्य : यदि वाक्य में एक क्रिया का होना दूसरे पर निर्भर करे अथवा एक कार्य का संकेत दूसरे कार्य से मिले तो उसे ‘ संकेतवाचक ‘ या ‘ संकेतार्थक वाक्य ‘ कहते हैं । जैसे-

यदि चुनाव निष्पक्ष हुआ तो देवो बाबू ही जीतेंगे ।

यदि वर्षा अच्छी हो तो फसल भी अच्छी होगी ।

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