काल किसे कहते हैं ?




आप जानते हैं काल किसे कहते हैं ? तो आज हम आपको ” काल किसे कहते हैं ” के बारे मैं जानकारी देने बाले हैं। जिससे आपको काल किसे कहते हैं पता चलेगा। तो आइये जानते हैं “ काल किसे कहते हैं”

काल किसे कहते हैं ?

” क्रिया के जिस रूप से उसके ( क्रिया के ) होने का समय तथा उसकी पूर्णता या अपूर्णता का बोध हो , उसे ‘ काल ‘ कहते हैं ।

” नीचे लिखे उदाहरणों को देखें –

  1. शकुन्तला सिलाई – कढ़ाई सीखती है ।
  2. शकुन्तला ने बी ० ए ० तक पढ़ाई की ।
  3. शकुन्तला एम ० ए ० की पढ़ाई करने दिल्ली जाएगी ।

विश्लेषण : प्रथम वाक्य की क्रिया से उसकी अपूर्णता और ‘ इस समय ‘ का बोध हो रहा है । दूसरे वाक्य की क्रिया से उसकी पूर्णता और ‘ बीते समय ‘ का तथा तीसरे वाक्य की क्रिया से उसकी अपूर्णता एवं ‘ आनेवाले समय ‘ का बोध हो रहा है । इस तरह काल के तीन प्रकार हुए

  1. इस समय का बोध करानेवाला
  2. बीते समय का बोध करानेवाला और
  3. आनेवाले समय का बोध करानेवाला ।

काल कितने प्रकार हैं ?

काल 3 प्रकार का हैं।

  • प्रथम को वर्तमानकाल ,
  • द्वितीय को भूतकाल और
  • तृतीय को भविष्यत् काल के नाम से जाना जाता है ।

वर्तमानकाल किसे कहते हैं और इसका भाग को विस्तार से समझें –

1. वर्तमान काल

” जिस काल का आरंभ तो हो चुका हो , पर समाप्ति नहीं हुई हो , उसे ‘ वर्तमान काल ‘ ( Present Tense ) कहते हैं । ” यानी वर्तमान काल गुजर रहे समय में होनेवाले कार्यों के बारे में बताता है । जैसे –

वह सदा बड़ों का कहना मानता है ।

दीपू परीक्षा की तैयारी कर रहा है ।

वे आज भी रिसर्च कर रहे होंगे ।

वर्तमान काल के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं –

1. सामान्य वर्तमान

सामान्य वर्तमान ( Present Indefinite / Simple Present ) से स्वभाव , आदत , चर्या , सामान्य जीवन – क्रम अथवा घटनाक्रम की अभिव्यक्ति होती है । जैसे-

वह प्रतिदिन देर से घर लौटता है ।

बंगाली चावल और पंजाबी रोटी ज्यादा खाते हैं ।

गाय मीठा दूध देती है ।

यह बस स्कूल जाती है ।

सामान्य वर्तमान की क्रिया ‘ धातु ‘ में ता / ते / ती जोड़कर आवश्यकतानुसार है / हो / हूँ लगाकर बनाई जाती है । जैसे-

  • जा + ता / ते । ती + है | हैं | हो / हूँ
  • पढ़ + ता / ते / ती + है | हैं । हो / हूँ

जाना ‘ , ‘ आना ‘ और ‘ होना ‘ तथा क्रम – प्रायिक रूप में पड़ना ‘ और ‘ उठना ‘ क्रियाओं की मदद से जटिल सामान्य वर्तमान का गठन होता है । इन क्रिया रूपों में उपर्युक्त विशिष्ट क्रियाएँ काल , लिंग तथा वचन के अनुरूप परिवर्तित होती हैं और अर्थ का संपादन करनेवाली मुख्य क्रियाएँ ‘ जाना ‘ और ‘ आना ‘ के साथ तो धातु रूप में ही आती हैं ; किन्तु ‘ होना ‘ के साथ वर्तमान कालिक कृदन्त रूप में आती हैं एवं लिंग तथा वचन के अनुरूप बदलती हैं । जैसे-

वह प्रायः आ जाता है ।

शिक्षक जब भी आते हैं , वह सोती रहती है ।

वे दोनों सुबह – सुबह आ जाती हैं ।

आप रुकिए , मैं कह आता हूँ ।

कहीं – कहीं गठनात्मक रूप में ‘ करना ‘ क्रिया स्वयं तो वर्तमानकालिक कृदन्त के रूप में आती है ; किन्तु वाक्य की मुख्य क्रिया भूतकालिक कृदन्त बन जाती है । जैसे-

राजू ही सब कुछ बताया ( भू ० कृ ०) करता ( वर्त ० कृ ०) है ।

मेरे दादाजी कहा करते हैं कि आज जहाँ सिनेमा हॉल है वहाँ कल तक गड्ढ़ा हुआ करता था ।

जिस तरह गत्यात्मक क्रियाओं के साथ ‘ करना ‘ का प्रयोग होता है , उसी तरह गतिहीन क्रियाओं के साथ रहना ‘ का प्रयोग होता है । जैसे –

वह भिखारी दिनभर यहीं बैठा रहता है ।

मैं सुबह से शाम तक चार रोटियों पर टँगा रहता हूँ ।

ठीक इसी तरह यदि गत्यात्मक क्रियाओं के साथ रहना ‘ का प्रयोग किया जाय तो दोनों का रूप समान वर्तमानकालिक हो जाएगा ? जैसे –

वहाँ एक छात्र पढ़ता रहता है ।

माली इन फूलों से माला बनाते रहता है ।

2. तात्कालिक वर्तमान

इस काल को ‘ अपूर्ण वर्तमान ‘ ( Present Imperfect Tense ) भी कहा जाता है । इस काल की क्रिया जारी रहती है यानी इससे सातत्यता का बोध होता है । जब किसी धातु में रहा । रहे । रही के बाद है । हैं | हो / हूँ जोड़ते हैं , तब तात्कालिक वर्तमान की क्रिया बन जाती है । जैसे –

जा + रहा / रहे | रही + है । हैं । हो / हूँ

( खा ) + रहा / रहे | रही + है | है | हो / हूँ

लता मंगेशकर गीत गा रही हैं

जाकिर हुसैन तबला बजा रहे हैं

बैठना , खड़ा होना , टॅगना , लटकना , पहनना , अटकना , फँसना , फैलना , बिखरना , लदना , पड़ा होना , अड़ना , बँधना , बिछना , लेटना , रँगना इत्यादि क्रियाएँ जब भी गत्यात्मकता के आधार पर कर्ता के कर्तृत्व को अभिव्यक्त करती हैं , तब इनका रूप भूतकालिक कृदन्त रहता है और उसके बाद है / हैं / हो / हूँ में से कोई सहायक क्रिया जुड़ जाती है । जैसे-

उस डाल से एक पतंग लटकी है ।

वह बछड़ा गाय के पास बैठा है ।

तात्कालिक वर्तमान ( सातत्यबोधक ) का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है :

कथन के समय चल रहे कार्य – व्यापार का निर्देश करने के लिए । जैसे-

वह इस समय रियाज कर रहा है , उसे परेशान मत कीजिए ।

नानीजी अभी नहा रही हैं , इसलिए वे अभी नहीं आ सकतीं ।

2. लगातार चलनेवाले कार्य व्यापार का निर्देश करने के लिए । जैसे-

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही है ।

समय का कुचक्र चल रहा है ।

3 . किसी खास समय में चल रहे कार्य व्यापार की अभिव्यक्ति के लिए । जैसे –

मैं आजकल होम्योपैथिक दवा ले रहा हूँ ।

वह आजकल समाज – विज्ञान का अध्ययन कर रहा है ।

4 . निकट भविष्य अथवा निश्चित भविष्य का निर्देश करने के लिए । जैसे –

मैं अगले रविवार को कोलकाता जा रहा हूँ ।

आप प्रतीक्षा कीजिए , वह अभी आ रहा है ।

किसी किसी वाक्य की क्रिया दीर्घकालिक सातत्य ( निरंतरता ) का बोध कराती है । जैसे –

वह हमेशा से गरीबों को सताता रहा है ।

इस वाक्य की क्रिया ‘ सताता रहा है ‘ से यह स्पष्ट होता है कि यह क्रिया बहुत दिनों से चलती आ रही है । हमेशा , सदा , बहुत दिनों से , वर्षों से , युगों से इनके प्रयोग से क्रिया की दीर्घकालिकता और भी बढ़ जाती है ।

सामान्य वर्तमान की तरह तात्कालिक वर्तमान में भी दीर्घकालिक गतिहीनता के लिए मुख्य क्रिया को भूतकालिक और सहायक क्रिया को तात्कालिक रूप में बदलना चाहिए । जैसे –

वह चार महीनों से यहीं लेटा रहा है ।

यहाँ कुछ ऐसे ही निशान बने हुए हैं ।

लगता है कोई देर तक बैठा रहा है ।

‘ वर्तमानकालिक कृदन्त + आया / आये / आयी + है । हैं / हो / हूँ तो वह भी दीर्घकालिक गत्यात्मक सातत्यबोधक वर्तमान काल को अभिव्यक्त करती है । जैसे-

मैं तो हमेशा से यही सुनता आया हूँ कि जिस प्रकार बड़ी मछली छोटी मछली को निगलती आई है , उसी प्रकार बड़े व्यापारी छोटे व्यापारियों को लीलते आए हैं ।

3. संदिग्ध वर्तमान

” जिस वर्तमानकालिक क्रिया से संदेह प्रकट हो , उसे ‘ संदिग्ध वर्तमान ‘ ( PresentDoubtful ) की क्रिया कहते हैं । “

इस काल की क्रिया की संरचना इस प्रकार होती है –

धातु + ता / ते / ती / रहा / रहे / रही + होगा / होगे / होगी / होंगे / होंगी । जैसे-

हिमालय में वर्षा होती होगी / हो रही होगी ।

सोनी अपने भैया को पत्र लिखती होगी / लिख रही होगी

भूतकाल किसे कहते हैं और इसका भाग को विस्तार से समझें –

भूतकाल ” क्रिया के जिस रूप से उसके बीते हुए समय में उसकी ( क्रिया की ) पूर्णता या अपूर्णता का बोध हो , ‘ भूतकाल ‘ ( Past Tense ) कहलाता । ” जैसे-

  1. मेरा बचपन बीत गया ।
  2. वह परीक्षा की तैयारी कर रहा था ।
  3. नेताजी ने गरीबी दूर करने की बात कही होगी ।
  4. कालिदास ने ‘ मेघदूत ‘ लिखा है ।
  5. प्रेमचंद ने ‘ गोदान ‘ लिखा था ।
  6. परसों शिमला में वर्षा होती थी ।
  7. उसने अच्छी तैयारी की होती तो परीक्षा पास कर जाता ।

विश्लेषण : ( a ) उपर्युक्त सभी वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाओं से बीते हुए समय का बोध हो रहा है । ( b ) ( i ) , ( iii ) , ( iv ) एवं ( v ) वाक्यों में क्रिया की पूर्णता और शेष वाक्यों में क्रिया की अपूर्णता दिखाई पड़ रही है ।

भूतकाल के छह प्रकार होते हैं :

1. सामान्य भूत

सामान्य भूतकाल ( Past Indefinite / Simple Past ) की क्रिया से सिर्फ यह जान पड़ता है कि क्रिया बीते हुए समय में हुईं , यह नहीं कि काम को हुए अधिक देर हुई या थोड़ी देर ।

इस काल की क्रिया की संरचना इस प्रकार होती –

‘ धातु + आ / ए / ई ‘ अथवा ‘ धातु + चुका / चुके / चुकी ‘ या ‘ धातु + या / ये / यी , जैसे-

अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया ।

मि ० टनाका ने वह नजारा देखा ।

जापान उस घटना को भूल चुका ।

2. आसन्न भूत

” क्रिया के जिस रूप से उसकी समाप्ति निकट भूत में या तत्काल सूचित होती है , उसे ‘ आसन्न भूत ‘ ( Present Perfect Tense ) की क्रिया कहते हैं । ”

इस काल को ‘ पूर्णवर्तमान ‘ के नाम से भी जाना जाता है , क्योंकि इसकी पूर्णता या समाप्ति वर्तमान के निकट में होती है । इस काल की क्रिया की संरचना के लिए सामान्य की संरचना में सिर्फ है / हैं / हो / हूँ लगाना पड़ता है । जैसे –

अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया है ।

मि ० टनाका ने देखा है ।

जापान उस घटना को भूल चुका है ।

3. पूर्णभूत

” क्रिया के जिस रूप से यह विदित हो कि उसके व्यापार को समाप्त हुए बहुत देर हो चुकी हैं ; यानी कोई क्रिया बहुत पहले हो चुकी है । ”

इस काल की क्रिया भी पूर्णताबोधक होती है । इसकी संरचना के लिए सामान्य की संरचना के बाद था / थे / थी जोड़ना पड़ता है । उपर्युक्त तीनों वाक्यों का पूर्णभूत ( Past perfect Tense ) रूप देखें –

अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया था ।

मि ० टनाका ने देखा था ।

जापान उस घटना को भूल चुका था ।

4.संदिग्ध भूत

संदिग्ध भूत ( Past Doubtful ) की क्रिया से बीते हुए समय में क्रिया की पूर्णता में संदेह रहता है ।

इसकी संरचना के लिए सामान्य भूत की संरचना के बाद होगा / होगे / होगी लगाना चाहिए । जैसे-

अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया होगा ।

मि ० टनाका ने देखा होगा ।

जापान उस घटना को भूल चुका होगा ।

5. अपूर्ण भूत

अपूर्ण भूत ( Past Imperfect Tense ) की क्रिया यह विदित होता है कि बीते हुए समय में कोई क्रिया जारी थी यानी पूर्णता को प्राप्त नहीं हुई थी ।

इसकी संरचना इस प्रकार होती है –

धातु + रहा / रहे / रही + था / थे / थी

या , धातु + ता / ते / ती + था / थे / थी

जैसे- वैज्ञानिक सूर्यग्रहण का नजारा देख रहे थे / देखते थे ।

उस समय ताजमहल का निर्माण कार्य चल रहा था ।

नैनीताल में मूसलधार वर्षा हो रही थी ।

6. हेतुहेतुमद्भूत

‘ हेतु ‘ का अर्थ होता है — ‘ कारण ‘ या ‘ प्रयोजन ‘ । हेतुहेतुमद्भूत काल ( Past Conditional ) की क्रिया से यह स्पष्ट होता है कि बीते हुए समय में कोई कार्य या व्यापार सम्पन्न होता ; लेकिन किसी कारण से नहीं हो सका । जैसे –

अंशु इंजीनियर बन गई होती यदि पॉलिटेक्निक की परीक्षा पास हो जाती ।

इस वाक्य में ‘ इंजीनियर न बनने का ‘ स्पष्ट हेतु है –

पॉलिटेक्निक का पास न होना ।

भूतकालिक क्रियाओं की रूपावली

‘ बैठ ‘ अकर्मक धातु सामान्य मत

भविष्यत् काल किसे कहते हैं और इसका भाग को विस्तार से समझें –

” जिस क्रिया से आनेवाले समय में किसी कार्य व्यापार के होने का बोध हो । जैसे –

हम बाजार जाएँगे और आवश्यक सामानों की खरीद करेंगे ।

इस वाक्य में ‘ जाना ‘ और ‘ खरीद करना ‘ का रूप भविष्यत् काल में है ।

भविष्यत् काल ( Future Tense ) के भी तीन प्रकार होते हैं-

1. सामान्य भविष्यत्

सामान्य भविष्यत् का व्यवहार भविष्य में कभी होनेवाली क्रिया के लिए , संभावना के लिए अथवा किसी अनिश्चित या अस्थायी रूप से निर्धारित कार्यक्रम के लिए होता है । जिस प्रकार सामान्य वर्तमान का व्यवहार वर्तमान में स्वभावतः होनेवाली क्रियाओं के लिए होता है , उसी प्रकार सामान्य भविष्यत् काल का व्यवहार भविष्य में स्वभावतः होनेवाली क्रियाओं के लिए होता है । इस काल की क्रिया का रूप ‘ धातु + गा / गे / गी ‘ होता है , जैसे –

माताजी तीर्थयात्रा पर जाएँगी ।

वह वायुयान से मुम्बई जाएगा ।

मैं प्रातः कॉलेज जाऊँगा ।

जिस प्रकार निश्चित भविष्य के लिए सातत्यबोधक वर्तमान का व्यवहार होता है , उसी प्रकार निकट भविष्य के लिए सामान्य वर्तमान का और कभी – कभी अधिक निकट भविष्य के लिए अनिश्चित भूतकालिक क्रियाओं का व्यवहार होता है । जैसे-

आप इसी जगह रुकिए , मैं अभी आता हूँ ।

आपको बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा , मैं बस गया और आया ।

स्पष्ट है कि सामान्य भविष्यत् – अनिश्चित भविष्य को ,

सातत्यबोधक वर्तमान – निश्चित भविष्य को ,

सामान्य वर्तमान – निकट भविष्य को और

अनिश्चित भूत – अधिक निकट भविष्य को अभिव्यक्त करते हैं ।

2. संभाव्य भविष्यत्

जिससे भविष्य में किसी कार्य या व्यापार के होने की संभावना व्यक्त की जाय ।

क्रिया के इस रूप से संभावना पर आधारित अनुमान की अभिव्यक्ति होती है । यों तो इसका संबंध किसी काल विशेष से न होकर संभावनार्थक अनुमान होता है , जो वर्तमान , निकट भविष्य अथवा निकट भूत को अभिव्यक्त करता है । इसमें भी सातत्यबोधक क्रिया – रूपों अथवा भूतकालिक कृदन्तों के साथ भविष्यत्कालिक क्रिया का प्रयोग करने से भविष्यत्कालिक सातत्यबोधक का गठन हो जाता है । इस काल की क्रिया की संरचना इस प्रकार होती है –

” … ” शायद / हो सकता है | संभव है + कर्ता + धातु + ए

जैसे- शायद पिताजी आएँ / कहें / जाएँ।बोलें ।

संभव है , इस माह के अंत तक परीक्षा हो जाए ।

शाम होने चली है , अब वह खेत से लौट रहा होगा ।

उसे तो एक बहाना मिल गया है । अब वह हर गली – कूचे में यही दुखड़ा रोएगी ।

वह कल देर से लौटा था , शायद दफ्तर में देर तक बैठा रहा हो ।

3. हेतुहेतुमद्भविष्य

इसमें भी भूतकाल की तरह किसी क्रिया का भविष्य में होना या न होना किसी कारण की उपस्थिति पर निर्भर करता है । जैसे-

इतनी ठंडक रहे तो सारे जल – स्रोत ही बर्फ हो जाएँ ।

वह लगातार इतनी मेहनत करे तो विद्वान् ही हो जाए ।

ये उनके सामाने इतनी गालियाँ दें तो झगड़ा ही हो जाए ।

वह रोज इतनी रात को आए तो लोग उसे कुलटा ही कहने लगें ।

काल परिवर्तन :

विभिन्न परीक्षाओं में काल – परिवर्तन से संबंधित प्रश्न आते रहे हैं । इसके लिए हमें विशेष रूप से इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि दिए गये वाक्यों की क्रिया किस काल और उसके किस भेद की है । सिर्फ काल बदल देने से हमारा उत्तर ठीक नहीं होता हमें दूसरे काल के उसी भेद में क्रिया को रखना चाहिए । जैसे –

वह बाजार जाता है । ( भूतकाल में बदले )

इस वाक्य में हम देख रहे हैं कि क्रिया सामान्य वर्तमान की है । अतएव हमें सामान्य भूत में ही बदलना होगा – वह बाजार गया ।

यदि हम ‘ वह बाजार जाता है ‘ को ‘ वह बाजार जाता था ‘ कर देते हैं तो उक्त क्रिया का रूप भूतकाल में तो हो जाता है , किन्तु ‘ सामान्य ‘ का न होकर वह ‘ अपूर्णभूत ‘ का बन जाता है और हमारा उत्तर गलत हो जाता है ।

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